धारा- 107/150/151 में चालान

इस धारा के अनुसार एरिया मजिस्ट्रेट या कोई अधिकारी ( स्पेशल एक्सिक्यूटिव मजिस्ट्रेट ) जो की एक पुलिस अफसर होता हे जिसे इस कार्य के लिए नियुक्त किया गया हो , किसी भी व्यक्ति के लिए आदेश प्रेसित करे और अगर प्रशासन को लगता है कि अमुख व्यक्ति से शांति भंग हो सकती है या अशांति फैलाई जा सकती है धारा- 107/150/151 में चालान

शांति भंग होने के संदेह के आधार पर किसी भी व्यक्ति को नोटिस दे सकता है कि क्यों न उसके अगले आदेश तक या फिर एक वर्ष के लिए उसे यह लिख देने को उस व्यक्ति को बाध्य किया जाए कि अगले आदेश तक या एक वर्ष तक कोई भी ऐसा काम नहीं करे जिससे शांति भंग होने कि संभावना हो । जो धारा- 107/150/151 CrPC से स्पस्ट होता है और इसी 107/116 में चालान काट दिया जाता है । धारा- 107/150/151 में चालान

SECTION 151 IN THE CODE OF CRIMINAL PROCEDURE,1973

  1. एक पुलिस ऑफिसर,

    जो ये विश्वाश कर की किसी व्यक्ति ने ऐसा कोई कार्य ( समाज में शांति भंग करने का ) किया हे तो उस व्यक्ति को बिना मजिस्ट्रेट के ऑर्डर के बिना वारंट के उसी वक्त गिरफ्तार कर सकता है ..

  2. इस धारा के अंतर्गत,

    गिरफ्तार हुए व्यक्ति को पुलिस ऑफिसर 24 घंटे से जयदा अपने पास नहीं रखेगा , तथा गिरफ्तार व्यक्ति को ऑथोरिज्ड व्यक्ति अर्थात एरिया मजिस्ट्रेट या कोई और अधिकारी ( विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ) के सामने पेश करेगा।

इस प्रकार के अपराध में –

  1. सड़क पर लड़ना जिससे की नागरिको को परेशानी हो
  2. व्यक्ति का सड़क पर या अपने निवास पर जोर से चिल्लाना या गाली देना जिससे की और नागरिक को असुविधा हो ।
  3. ऐसे कपड़ा पहनना जिससे की किसी और साधारण नागरिक को या समाज को असुविधा हो ।
  4. किसी नारी को इस प्रकार के इशारे करना या हरकत करना जिससे की वह असुविधा महसूस करे ।
  5. चुनाव के समय लागू कानून आचार संहिता में कसी भी प्रकार की रोक टोक उत्पन्न करना या उस आचार संहिता को छति पहुँचाना या पहुचाने की कोशिश करना ।
  6. किसी अन्य कानून को लागू होने से रोकना या उसकी आचार संहिता को छति पहुँचाना
  7. किसी प्रकार का बल या वस्तु का उपयोग करके सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाना
  8. कोई बस्तु का प्रयोग करके सरकारी सड़क जो की नागरिको के उपयोग के लिए हे उसमें कोई व्यवधान उत्पन्न करना या कोई वस्तु उस पर डालना , शामिल किया गया है ।

In english

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केस किस जज या कोर्ट में चलता है :
 

ये केस बाकि केसों की तरह नही होता है जो की प्रॉपर कोर्ट में चले ये केस उस डिस्ट्रिक्ट एरिया के ACP साहब के पास चलता है जो की वीमेन सेल के इन्चार्गे भी होते है | जब वे केस की सुनवाई करते है तो वे SEM कहलाते है यानी की “स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट” |
ये पॉवर उनको स्टेट देती है | उनका जुडीसीरी से कोई मतलब नही होता है वे उनके अंडर में भी काम नहीं करते है सिर्फ इसी प्रकार के केस देखते है।
ये केस नॉर्मली 6 महीने ही चलते है तथा बाद में आरोपी को एक पीस बांड लेकर छोड़ दिया जाता है पर अगर कोर्ट चाहे तो इन केसो को अपने पास एक साल के लिए रख सकती है। पर एक साल के बाद कोई भी कोर्ट किसी भी आरोपी को अपनी कोर्ट में पेश होने के लिए बाउंड नही कर सकती है। एक साल के बाद आरोपी अपने आप बरी है। अगर कोई कोर्ट आपको परेशान करती है तो आप उसकी शिकायत अपने D.C. P. या C. P. साहब या district judge या हाई कोर्ट से कर सकते है!
section 107/150/151 crpc में सजा :
 
वैसे तो कोर्ट चाहे तो अपराध सिद्ध होने पर आरोपी को एक साल तक की सजा सुना सकती है | पर मैंने तो आज तक किसी को इन केसों में सजा होते नही देखा है। इसलिए कोई judgment यहा नही दे रहा हु । (लेकिन इसका मतलब ये नही है की आप लोग मेरी इस बात को गलत तरीके से ले)।
 
 section 107/150/151 crpc में बिना केस लडे बरी होना:
 
इस बात को किसी को भी नही पता है में आप लोगो बता रहा हु की अगर आप आरोपी कोर्ट में अपना केस नहीं चलाना चाहता है या कोर्ट से बिना केस लडे बरी होना चाहता है तो वह कोर्ट में पहली ही तारीख पर अपना peace bond धारा .. के तहत दे कर इस कानूनी कार्यवाही से बच सकता है इस bond में ये लिखा होता है की में आज के बाद ऐसा कोई भी कार्य नहीं करूंगा जिससे की समाज की शांति भंग हो या किसी नागरिक को कोई परेशानी हो या किसी भी सरकारी सम्पति को नुकशान पहुचे और अगर ऐसा एक साल के अंदर होता है तो में इस अपराध का दोषी माना जा सकता हु | ऐसा कर के आप इस लम्बी क़ानूनी कार्यवाही से बच सकते हो। पर ये ध्यान रहे की अगले एक साल तक आप पर कोई ऐसा शांति भंग का आरोप नही लगे | इसका बांड का नुक्सान ये होता है की सामने वाली विरोधी पार्टी आप पर कोई भी झूठा आरोप लगा कर दुबारा केस स्टार्ट करवा सकती है । इसलिए अगर विरोधी पार्टी भी बाड दे तो आपको देना चाहिए वरना इससे बचे |
 
इसके अलवा भी अगर आप धारा 117 CR.P.C के तहत बांड नही देना चाहते है तो आप कोर्ट के सामने अंडरटेकिंग दे सकते है इसमें आप पर कोई कानूनी कार्यवाही नही होगी और न ही विरोधी पार्टी इसका कोई लीगल फायदा उठा पायेगी । ( धारा- 107/150/151 में चालान )

ऐसा कर के आप इस लम्बी क़ानूनी कार्यवाही से बच सकते हो। पर ये ध्यान रहे की अगले एक साल तक आप पर कोई ऐसा शांति भंग का आरोप नही लगे | इसका बांड का नुक्सान ये होता है की सामने वाली विरोधी पार्टी आप पर कोई भी झूठा आरोप लगा कर दुबारा केस स्टार्ट करवा सकती है । इसलिए अगर विरोधी पार्टी भी बाड दे तो आपको देना चाहिए वरना इससे बचे |

इस बात को किसी को भी नही पता है में आप लोगो बता रहा हु की अगर आप आरोपी कोर्ट में अपना केस नहीं चलाना चाहता है या कोर्ट से बिना केस लडे बरी होना चाहता है तो वह कोर्ट में पहली ही तारीख पर अपना peace bond धारा .. के तहत दे कर इस कानूनी कार्यवाही से बच सकता है इस bond में ये लिखा होता है की में आज के बाद ऐसा कोई भी कार्य नहीं करूंगा जिससे की समाज की शांति भंग हो या किसी नागरिक को कोई परेशानी हो या किसी भी सरकारी सम्पति को नुकशान पहुचे और अगर ऐसा एक साल के अंदर होता है तो में इस अपराध का दोषी माना जा सकता हु |

section 107/150/151 CrPC में बिना केस लडे बरी

यह एक सामान्य धारा है जो दंडनीय है वैसे तो कोर्ट चाहे तो अपराध सिद्ध होने पर आरोपी को एक साल तक की सजा सुना सकती है , सामन्यता ऐसा होता नहीं हे ।

section 107/150/151 crpc में दंड

ये केस नॉर्मली 6 महीने ही चलते है तथा बाद में आरोपी को एक पीस बांड लेकर छोड़ दिया जाता है पर अगर कोर्ट चाहे तो इन केसो को अपने पास एक साल के लिए रख सकती है। पर एक साल के बाद कोई भी कोर्ट किसी भी आरोपी को अपनी कोर्ट में पेश होने के लिए बाउंड नही कर सकती है। एक साल के बाद आरोपी अपने आप बरी है। अगर कोई कोर्ट आपको परेशान करती है तो आप उसकी शिकायत अपने D.C. P. या C. P. साहब या district judge या हाई कोर्ट से कर सकते है

ये पॉवर उनको स्टेट देती है | उनका जुडीसीरी से कोई मतलब नही होता है वे उनके अंडर में भी काम नहीं करते है सिर्फ इसी प्रकार के केस देखते है।

ये केस बाकि केसों की तरह नही होता है जो की प्रॉपर कोर्ट में चले ये केस उस डिस्ट्रिक्ट एरिया के ACP साहब के पास चलता है जो की वीमेन सेल के इन्चार्गे भी होते है | जब वे केस की सुनवाई करते है तो वे SEM कहलाते है यानी की “स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट” |

 

केस किस जज या कोर्ट में चलता है :

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कानूनी अधिकार जो हर भारतीय नागरिक को पता होकानूनी अधिकार जो हर भारतीय नागरिक को पता हो



१.शाम के वक़्त महिलाओ की गिरफ़्तारी नहीं –  Code of criminal processer , 1973  section 46  के तहत शाम ६ बजे के बाद और सुबह के ६ बजे तक पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती फिर अपराध कितना भी संगीन क्यों ना हो।अगर कोई भी पुलिस अधिकारी

आमतौर पर FIR के बारे में सभी लोग जानते है पर इसके साथ साथ ज़ीरो ZERO FIR क्या होता है आईंए जानते है-आमतौर पर FIR के बारे में सभी लोग जानते है पर इसके साथ साथ ज़ीरो ZERO FIR क्या होता है आईंए जानते है-



सबसे पहले ये जाने की FIR क्या होती है और कैसे दर्ज की जाती है :- जैसे की हम जानते है की जब किसी अपराध की सूचना पुलिस अधिकारी को दी जाती है, तो उसे FIR कहते हैं। इसका पूरा रूप है ‘फर्स्ट इनफॉरमेशन रिपोर्ट। जानकारी के लिए बता दे पुलिस