Ipc के धारा 323,504,506 क्या है?

अक्सर आप लोगो ने सुना होगा की घर के बगल में, या कही आस पास मोहल्ले में या कही दूर गावं में दो पक्षों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया, यह विवाद इतना बढ़ गया की धमकी ,मार पीट, गाली गलौज की नौबत आ गयी। विवाद में घायल पक्ष की और से पुलिस बुलाई गयी और धमकी, मारपीट गाली गलौज करने वाले पक्ष के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो गयी। 

आईपीसी की धारा 323  के विषय में (चोट लगने और स्वेच्छा से चोट पहुंचाने का अर्थ)

आइये अब जानते है की आखिर चोट लगने और स्वेच्छा से चोट पहुंचाने का क्या अर्थ है –  ऐसी चोट जिसके फलस्वरूप किसी भी आदमी की मृत्यु नहीं होती है आमतौर पर गैर-घातक अपराधों से संबंधित होती है। इस तरह हम देखते है ऐसे कई तरीके होते हैं जिनसे कोई व्यक्ति समाज के खिलाफ या किसी व्यक्ति के खिलाफ गैर-घातक अपराध कर सकता है, उदाहरण के लिए शारीरिक चोट, संपत्ति को नष्ट करना  या किसी घातक बीमारी से किसी को संक्रमित करना  लेकिन इनमे ज्यादातर अपूरणीय। यहाँ पर हमें मालूम  होना चाहिए कि जिन्हें स्वेच्छा से किसी को चोट पहुंचाने और चोट लगने का क्या अर्थ है |

323 को – इसमें जानबूझ कर स्वेच्छा से किसी को चोट पहुँचाना, यूँ कहें कि इसमें साधारण मारपीट करना, झगड़ा, किसी की पिटाई करना  ये अपराध वर्णित है इसमें  सजा – 1 वर्ष कारावास या  रुपए 1000 का जुर्माना या दोनों हो सकता है | आपको बताते चले कि यह एक जमानती, असंज्ञेय अपराध है और साथ ही यह किसी भी न्यायाधीश द्वारा सुनने योग्य  है। यह अपराध पीड़ित / चोटिल व्यक्ति द्वारा समझौता करने कि भी योग्य है। जानबूझकर इस तरह आप जान गए होंगे कि जानबूझकर या स्वेच्छा से किसी के साथ साधारण मारपीट किये जाने पर IPC का यह सेक्शन अप्लाई हो जायेगा |

IPC का सेक्शन 319 बताता है कि जब कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचाना किसी व्यक्ति को शारीरिक दर्द, चोट या किसी बीमारी का कारण बनता है। यह स्वेच्छा से या अनैच्छिक रूप से हो सकता है। यहाँ यह जानना बहुत जरूरी है कि इस तरह के चोट पहुंचाने वाले व्यक्ति के पास ऐसा करने का इरादा नहीं होना चाहिए। 

भारतीय दंड संहिता की धारा 504 व्धारा 506 क्या है ? 

यदि कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को अपमानित करता है, जो कि उस व्यक्ति के साथ गालीगलौज करता है साथ में धमकी देता है,जो कि यह धमकी जान से मारने की हो, या आग से जला देने की धमकी हो, या किस संपत्ति को नष्ट करने की धमकी देता है, ऐसा करने वाले व्यक्ति पर भारतीय दंड संहिता की धारा 504 व् धारा 506  लगती है। 

जो कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को जानभूझकर कर अपमानित करेगा और इस तरह उस व्यक्ति को इस इरादे से उकसाता है, कि वह यह संभव जनता है, कि उसके उकसाने से वह लोक शांति भंग करेगा या कोई अपराध कारित करेगा, वह दोनों में से कसी भी भांति के दंड से दण्डित किया जायेगा, जो कि 2 वर्ष तक की अवधि का कारावास या जुर्माना या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

सजा –  धारा 504 के तहत  2 साल की कारावास या जुर्माना या दोनों।
जमानतीय या गैर जमानतीय :- यह एक जमानतीय अपराध है।
संज्ञेय याअसंज्ञेय :- यह एक असंज्ञेय अपराध है।
किस न्यायलय में विचारणीय होगा :- कोई भी मजिस्ट्रेट इस अपराध पर विचरण कर सकेगा।
समझौते योग्य याअसमझौते योग्य :- यह अपराध समझौते योग्य है या नहीं यह पीड़ित पक्षकार पर निर्भर करता है कि वह समझौता करे या नहीं।

जो कोई भी व्यक्ति आपराधिक धमकी देने का अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भी भांति के दंड से दण्डित किया जायेगा, जो की कारावास जिसकी अवधि 2 साल तक की होगी , या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जायेगा। 


सजा :- धारा 506 के तहत 2 साल तक की सजा  जुरमाना
जमानतीय या अजमानतीय :- यह अपराध जमानतीय होगा।
संज्ञेययाअसंज्ञेय :- यह अपराध असंज्ञेय होगा।
किस न्यायालय में विचारणीय होगा :-  किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होगा।

यदि धमकी मृत्यु या गंभीर क्षति इत्यादि कारित करने की हो – 

  1. यदि मृत्यु कारित करने की धमकी 
  2. गंभीर क्षति कारित करने की धमकी,
  3. अग्नि द्वारा किसी संपत्ति का नाश करने की धमकी,
  4. किसी स्त्री पर अस्तित्व पर लांछन लगाने की धमकी,
  5. मृत्यु दंड से या आजीवन कारावास से  वर्ष की अवधि तक दंडनीय अपराध कारित करने की धमकी हो, तो वह व्यक्ति दोनों में से किसी भी भांति के दंड से दण्डित किया जायेगा, जो कि कारावास जिसकीअवधि 7 सालतक की हो सकेगी या जुर्मानासेयादोनोंसेदण्डित किया जायेगा। 

सजा :- अपराध की सजा 7 साल कारावास या जुर्माना या दोनों से। 

जमानतीय या गैर–जमानतीय :- यह अपराध जमानतीय है। 

संज्ञेय याअसंज्ञेय :-  यह अपराध संज्ञेय अपरापध है। 

किस न्यायालय में विचारणीय होगा :- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होगा। 

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