Gold कारोबारियों को होने वाली कानूनी समस्याएं –

ज्वैलर्स, सर्राफ, Gold कारोबारियों को होने वाली कानूनी समस्याएं में ऐसा माना जाता है की स्वर्णकार व्यापारी को पुलिस से काफी दिक्क्त होती है परन्तु उनके ही कुछ लापरवाही के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसीलिए उन्ही उपायों के बारे में कुछ बाते बताई गई है जिससे गोल्ड / Goldकारोबारियों को कानूनी समस्या से निजात मिल सके ।

अक्सर ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति ज्वेलरी सामान सुनार के दुकान पर बेच जाता है और फिर पुलिस स्टेशन से कुछ दिन बाद फोन आता है या पुलिस के लोग आते है और थाने पे बुलाते है।

थाने पर पहुंचने पर पता चलता है की किसी चोर से आपने कम दाम में सामान खरीदा है । अब व्यापारी को ऐसा पता ही नहीं की उसने कभी किसी चोर से सामान खरीदा भी था और जब पुलिस व्यक्ति की पहचान कराती है तो पता चलता है की ये व्यक्ति जिसे चोर कह रहे है वो कुछ रोज पहले घर परिवार का रोना रो कर/मजबूरी बता कर सामान बेचने आया था।

मै सुनार होने के नाते उसके सामान और उसकी मजबूरी देखते हुए उसकी सहायता करने को सोचा और सामान का उचित दाम भी लगा दिया ,अब ये अच्छाई ही मेरे गले की हड्डी बन गई , जो मैने उस मजबूर व्यक्ति की सहायता के बारे में सोचा और मै पुलिस थाने में आ बैठा ।

शुरुआती समस्या

पुलिस के सामने सामान की असली मालिक शिकायत करते है सामान चोरी की और पुलिस चोर को पकड़ के थाने पर लाती है , और चोर से सामान के बारे में पूछने पर चोर सुनार भाई का नाम बताता है और तब पुलिसथाने से कुछ लोग सुनार भाई को ले आते हैं और सामान की बरामदगी करवाने की बात करते हैं जो सामान सोनार के दुकान पर बेचा गया।

अब सोनार भाई को यहां समस्या आती है यदि सामान गला दिया गया हो उनके द्वारा तो बरामद कैसे करेंगे और यदि है सामान अभी गले नहीं है ,तब उन्होंने चोर का आधार कार्ड की कॉपी नहीं लिया हस्ताछर नहीं करवाया तो, पुलिस का संदेह जाएगा कि सोनार भाई ने जानते हुए की सामान चोरी का है , उस सामान को कम कीमत पर आशय के साथ खरीद लिया। जिससे बड़ी समस्या हो सकती है ।

चोर जब भी जेबर किसी सुनार की दुकान मे बेचता है तो यह नही बताता कि

यह सामान चोरी का है , बेचारा दुकानदार जेवर खरीदकर फँस जाता है और आईपीसी की धारा 411 और 412 के तहत कार्यवाही होने लगती है ..

धारा 411 एवं 412 से बचने का उपाय

सबसे पहले कोई समान बेचने आए तो उसका आधार कार्ड लेकर उसपर उससे हस्ताछर करवाकर ये लिखवा ले कि ये जेवर चोरी का नही है ।

अगर पुलिस आप के दुकान पर आए तो पुलिस को कहिए कि आप चोर पर धारा 120B तथा 420, 379 का मुकदमा दर्ज करे । इस अपराध को पंजीकृत कराने के लिए आपको माल बेचे गए व्यक्ति के आधार कार्ड की आवश्यकता होगी ।

पुलिस को कहिए कि वह आपका सहयोग करे । अगर पुलिस आपका सहयोग नहीं करे तो आप पुलिस अधिकारी की शिकायत उच्च अधिकारी से करते हुए धारा 166 तथा 167 का मुकदमा दर्ज करवाये ।

अगर जेवर का असली मालिक चाहे तो आपके साथ समझौता करके अपना व्यापारी को नगद धनराशि देकर अपना माल वापस ले सकता है ।

अगर जेवर का मालिक आपका धनराशि नही देता है तो आप माल के मालिक पर केस दर्ज करवा सकते है कि वह षड्यंत्र के द्वारा चोर से मिलकर आपको फॅसा रहा है और ये अपराध की श्रेणी 120B तथा 420 में आता है ।

यह करने से जेवर का मालिक आपसे समझौता करके केस वापस ले लेगा आप इस परेशानी से आसानी से निकल जाएगे ।

इसलिए इन उपायों को हमेशा सामान खरीदते समय ध्यान रखे ताकि भविष्य में आपको दिक्क्त न हो पुलिस केवल अपना काम करती है उसके सामने अगर आप अपने आपको सहज और उचित साक्छ्य के साथ अपने आप को प्रस्तुत करे और पुलिस की सह्ययता करे जिससे आपको आसानी हो और कार्यवाही पूरी हो सके । vidhiconcept

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